रमज़ान की क़द्र ना करने का अज़ाब | Ramdan story in hindi | ramdan story | ramzan 2017
☆रमज़ान की क़द्र ना करने का अज़ाब...!!
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♥️एक बार मौला ए काएनात ह़ज़रत अली शेरे खुदा (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ज़ियारते क़ुबूर के लिए कूफा के क़ब्रिस्तान में तशरीफ़ ले गए !
वहां एक ताज़ा क़ब्र पर नज़र पड़ी ! आपको उस के ह़ालात मालूम करने की ख़्वाहिश हुई !
*चुनान्चे : बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज़ गुज़ार हुए :
"या अल्लाह इस मय्यत के ह़ालात मुझ पर मुन्कशिफ़ (यानी ज़ाहिर) फ़रमा !
फौरन अल्लाह तआ़ला की बारगाह में आपकी इल्तिजा मसमूअ हुई (यानी सुनी गई) और देखते ही देखते आपके और उस मुर्दे के दरमियान जितने पर्दे थे तमाम उठा दिए गए !
अब एक हैबतनाक मन्ज़र आपके सामने था, क्या देखते हैं कि मुर्दा आग की लपेट में हैं और रो रो कर इस त़रह़ आपसे फ़रियाद कर रहा हैं:
*या अली, मैं आग में ड़ूबा हुआ हूं और आग में जल रहा हूं !"
क़ब्र के दहशत नाक मन्ज़र और मुर्दे की चीख़ों पुकार और दर्दनाक फ़रियाद ने ह़ज़रत अली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) को बेकरार कर दिया, आपने अल्लाह तआला के दरबार में हाथ उठा दिए और निहायत ही आजिज़ी के साथ उस मुर्दे की बख्शिश के लिए दरख़्वास्त पेश की !
ग़ैब से आवाज़ आई :
*ऐ अली, आप इस की सिफ़ारिश ना ही फ़रमाए क्यूं कि रोज़े रखने के बा वुजूद ये शख्स रमज़ानुल मुबारक की बे हुरमती करता था, रमज़ानुल मुबारक में भी गुनाहों से बाज़ न आता था ! दिन को रोज़े रख लेता था मगर रातों को गुनाहों में मुब्तला रहता था !"
●ह़ज़रत अली कर्रमल्लाह तआला वज्हुल करीम ये सुन कर और भी रंजीदा हो गए और सज्दे में गिर कर रो रो कर अर्ज़ करने लगे :
"या अल्लाह , मेरी लाज तेरे हाथ में हैं, इस बन्दे ने बड़ी उम्मीद के साथ मुझे पुकारा हैं, मेरे मालिक, तू मुझे इस के आगे रुस्वा न फ़रमा, इस की बेबसी पर रह़म फ़रमा दे और इस बेचारे को बख़्श दे !"
ह़ज़रत अली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) रो रो कर मुनाजात कर रहे थे !
अल्लाह तआला का दरिया ए रह़मत जोश में आया और निदा आई :
"ऐ अली, हमने तुम्हारी शिकस्ता दिली के सबब इसे बख़्श दिया !"
चुनान्चे उस मुर्दे पर से अज़ाब उठा लिया गया !
(अनीसुल वाइज़ीन, सफ़ा-25)
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♥️एक बार मौला ए काएनात ह़ज़रत अली शेरे खुदा (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) ज़ियारते क़ुबूर के लिए कूफा के क़ब्रिस्तान में तशरीफ़ ले गए !
वहां एक ताज़ा क़ब्र पर नज़र पड़ी ! आपको उस के ह़ालात मालूम करने की ख़्वाहिश हुई !
*चुनान्चे : बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज़ गुज़ार हुए :
"या अल्लाह इस मय्यत के ह़ालात मुझ पर मुन्कशिफ़ (यानी ज़ाहिर) फ़रमा !
फौरन अल्लाह तआ़ला की बारगाह में आपकी इल्तिजा मसमूअ हुई (यानी सुनी गई) और देखते ही देखते आपके और उस मुर्दे के दरमियान जितने पर्दे थे तमाम उठा दिए गए !
अब एक हैबतनाक मन्ज़र आपके सामने था, क्या देखते हैं कि मुर्दा आग की लपेट में हैं और रो रो कर इस त़रह़ आपसे फ़रियाद कर रहा हैं:
*या अली, मैं आग में ड़ूबा हुआ हूं और आग में जल रहा हूं !"
क़ब्र के दहशत नाक मन्ज़र और मुर्दे की चीख़ों पुकार और दर्दनाक फ़रियाद ने ह़ज़रत अली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) को बेकरार कर दिया, आपने अल्लाह तआला के दरबार में हाथ उठा दिए और निहायत ही आजिज़ी के साथ उस मुर्दे की बख्शिश के लिए दरख़्वास्त पेश की !
ग़ैब से आवाज़ आई :
*ऐ अली, आप इस की सिफ़ारिश ना ही फ़रमाए क्यूं कि रोज़े रखने के बा वुजूद ये शख्स रमज़ानुल मुबारक की बे हुरमती करता था, रमज़ानुल मुबारक में भी गुनाहों से बाज़ न आता था ! दिन को रोज़े रख लेता था मगर रातों को गुनाहों में मुब्तला रहता था !"
●ह़ज़रत अली कर्रमल्लाह तआला वज्हुल करीम ये सुन कर और भी रंजीदा हो गए और सज्दे में गिर कर रो रो कर अर्ज़ करने लगे :
"या अल्लाह , मेरी लाज तेरे हाथ में हैं, इस बन्दे ने बड़ी उम्मीद के साथ मुझे पुकारा हैं, मेरे मालिक, तू मुझे इस के आगे रुस्वा न फ़रमा, इस की बेबसी पर रह़म फ़रमा दे और इस बेचारे को बख़्श दे !"
ह़ज़रत अली (रजी अल्लाहु तआला अन्हु) रो रो कर मुनाजात कर रहे थे !
अल्लाह तआला का दरिया ए रह़मत जोश में आया और निदा आई :
"ऐ अली, हमने तुम्हारी शिकस्ता दिली के सबब इसे बख़्श दिया !"
चुनान्चे उस मुर्दे पर से अज़ाब उठा लिया गया !
(अनीसुल वाइज़ीन, सफ़ा-25)