रात का समय था। सारा मदीना शहर सोया पड़ा था Islamic story in hindi | Urdu story in hindi | Ramzan story in hindi

रमजान मे मस्जिद मे कुलर .....
पंखे लगवाने से पहले ये जरुर दैख लैना
पडोसी के घर मे सहरी औऱ इफ्तार
का इंतजाम हुआ या नही.....|

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रात का समय था। सारा मदीना शहर सोया पड़ा था। उसी समय हजरत उमर शहर से बाहर निकले। तीन मील जाने के बाद एक औरत दिखाई दी। वह कुछ पका रही थी। पास ही दो तीन बच्चे रो रहे थे। हजरत उमर ने उस औरत से पूछा, "ये बच्चे क्यों रो रहे है?" औरत ने जबाब दिया, "भूखे हैं। कई दिन से खाना नहीं मिला। आज भी कुछ नहीं है। खाली हांडी में पानी डाल कर पका रही हूं।

हजरत ने पूछा, "ऐसा क्यों कर रही हो?"

औरत ने जवाब दिया, "बच्चों का मन बहलाने के लिए।"

हजरत उमर तड़प उठे। उसी समय वापस लौटे। खजाने से घी, आटा और खजूरें ली। नौकर से बोले, "इन्हें मेरी पीठ पर बांध दो।" नौकरी ने कहा, "यह आप क्या कर रहे हैं? मैं ले चलता हूं।" हजरत उमर ने जबाब दिया, "कयामत में मेरा र्बोझ तुम नहीं उठाओगे।"

सब चीजें चह खुद लाद कर ले चले। उसी औरत के पास पहुंचे। उसने ये चीजें देखी तो बहुत खुश हुई। जल्दी-जल्दी आटा गूंथा। हांडीं चढ़ाई। हजरत उमर चूल्हा फूंकने लगे। खाना तैयार हुआ। बच्चों ने पेट भर कर खाया। खाकर उछलने कूदने लगे। हजरत उमर देखते थे, खूब खुश होते थे। मां भी बहुत खुश थी। बार-बार दुआएं दे रही थी। कहती थी, "खलीफा तुमको होना चाहिए। उमर इस काबिल नहीं है।"

बेचारी गरीब मां! उसे कौन बताता कि वह किस से बातें कर रही है ।

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