जब मेरे आका ने हजरते बीलाल को काबे की छत पे चढाया ओर हुकम दीया के ऐ बीलाल तुम अजान दो... | Azan-makka madina- kaaba story in hindi
जब मेरे आका ने हजरते
बीलाल को काबे की छत
पे चढाया ओर हुकम दीया
के ऐ बीलाल तुम अजान दो,
तो हजरते बीलाल सोच मेl
पड गए ! जब दुसरी बार
मेरे आका ने हुकम दीया के,
ऐ बीलाल तुम अजान दो,
तो हजरते बीलाल फीर सोच
मे पड गए ! तीसरी दफा मेरे
आका ने हुकम दीया के
बीलाल अजान का वकत हो
चुका है अजान शुरु करो
तब हजरते बीलाल ने कहा
के हुजुर आप पर मेरे मां बाप
कुरबान के जब मे जमीन पे
अजान देता था तो काबे की
तरफ रुख करके अजान देता
था अब तो आप ने काबे की
छत पे चढा दिया है, मैं ऱुख
किधर करके अज़ान दुं ?
तब मेरे आका ने हुकम दीया
के बीलाल तुम मेरी तरफ
रुख करदो ओर अजान दो !
इसिलिए आलाहज़रत फरमाते
है के,
"हाजीयों आओ शहेनशाह का
रोज़ा देखो !!
क़ाबा तो देख चुके क़ाबे का
क़ाबा देखो" !!!!
किसी को जमाने की दौलत
मिली ,
किसी को जहाँ की हुकूमत
मिली ,
मै अपने मुक़द्दर पे क़ुर्बान हो जाऊ,
क्यो के मुझे रसूले पाक
की उम्मत मे जगह मिली.....
कितना बुलंद मेरे नबी का मक़ाम हैं
कि सारा ज़माना पढ़ता उनपे दरूदोसलाम हैं
बीलाल को काबे की छत
पे चढाया ओर हुकम दीया
के ऐ बीलाल तुम अजान दो,
तो हजरते बीलाल सोच मेl
पड गए ! जब दुसरी बार
मेरे आका ने हुकम दीया के,
ऐ बीलाल तुम अजान दो,
तो हजरते बीलाल फीर सोच
मे पड गए ! तीसरी दफा मेरे
आका ने हुकम दीया के
बीलाल अजान का वकत हो
चुका है अजान शुरु करो
तब हजरते बीलाल ने कहा
के हुजुर आप पर मेरे मां बाप
कुरबान के जब मे जमीन पे
अजान देता था तो काबे की
तरफ रुख करके अजान देता
था अब तो आप ने काबे की
छत पे चढा दिया है, मैं ऱुख
किधर करके अज़ान दुं ?
तब मेरे आका ने हुकम दीया
के बीलाल तुम मेरी तरफ
रुख करदो ओर अजान दो !
इसिलिए आलाहज़रत फरमाते
है के,
"हाजीयों आओ शहेनशाह का
रोज़ा देखो !!
क़ाबा तो देख चुके क़ाबे का
क़ाबा देखो" !!!!
किसी को जमाने की दौलत
मिली ,
किसी को जहाँ की हुकूमत
मिली ,
मै अपने मुक़द्दर पे क़ुर्बान हो जाऊ,
क्यो के मुझे रसूले पाक
की उम्मत मे जगह मिली.....
कितना बुलंद मेरे नबी का मक़ाम हैं
कि सारा ज़माना पढ़ता उनपे दरूदोसलाम हैं